12 January 2026

सैफ़ बाबर (Mohd Saif Babar) के चुनिंदा कित'आत

हवा में अपनी अना का बखान करते हुए

ग़ुरूर करते हुए हौसलों पे मरते हुए

बुलन्दियों पे जो पहुँचो तो भूल मत जाना 

ज़मीं पे आ गए कितने उड़ान भरते हुए

भी नहीं है

शाइर

सैफ़ बाबर

(Mohd Saif Babar) 

+91 9936008545 

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दफ़्तर से लौट कर तो यही चाहता है दिल 

यादों में लिपटे घर के दरो-बाम से रहें 

परदेस में कमाने हम आए हैं इस लिए

बच्चे हमारे देस में आराम से रहें

 शाइर

सैफ़ बाबर

(Mohd Saif Babar)

+91 9936008545

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ये किसके-किसके निशाने पे आ रहा हूँ मैं

किसी तरह से मियाँ जाँ बचा रहा हूँ मैं 

कमाई देस में हो जाती है अच्छी ख़ासी

सुकून के लिए परदेस जा रहा हूँ मैं

शाइर

सैफ़ बाबर

(Mohd Saif Babar)

+91 9936008545

.... 

हमारे पास है जो कुछ वो देन है रब की 

अमीरे शहर बदौलत नहीं हूँ मैं तेरी

सगे ही रिश्ते से इन्कार करने वाले सुन

ग़रीब भाई हूँ तोहमत नहीं हूँ मैं तेरी

शाइर

सैफ़ बाबर

(Mohd Saif Babar)

+91 9936008545

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हुनर मैं बात को कहने का अपनी रखता हूँ

मैं गूंगा बहरा नहीं हूँ ज़ुबान वाला हूँ 

परिंदा उड़के ये कहता है सारी दुनिया से

ज़मीं पे रहता हूँ लेकिन उड़ान वाला हूँ

शाइर

सैफ़ बाबर

(Mohd Saif Babar)

+91 9936008545 

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रिश्तों का पास पैरों में ज़ंजीर है कहाँ

अब राँझा ढूंढ़ता है मिरी हीर है कहाँ 

ये ही मुशायरे हैं तो फिर सोचता हूँ "सैफ़" 

मेरी ग़ज़ल कहाँ है मिरा मीर है कहाँ

शाइर

सैफ़ बाबर

(Mohd Saif Babar)

+91 9936008545 

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दाग़ ए हस्ती में झलकती है मिरी जान कभी 

दिल के ज़ख़्मों में चमकती है मिरी जान कभी 

कितनी दिलकश है ग़ज़ल देख तिरे शाइर  की 

जब ये आँखों से छलकती है मिरी जान कभी

शाइर

सैफ़ बाबर

(Mohd Saif Babar)

+91 9936008545 

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लौ चराग़ों की अभी और बढ़ाना होगी 

साख दुनिया में हमें अपनी बचाना होगी 

पर्दा लाज़िम है मगर बेटी को बेटे की तरह 

आज के दौर में ता'लीम दिलाना होगी

शाइर

सैफ़ बाबर

(Mohd Saif Babar)

+91 9936008545 

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ज़लिलो ख़्वार सियासत भी छोड़ दी मैंने 

लो इस सदी की सहाफ़त भी छोड़ दी मैंने

मैं थक चुका था बहुत झूट की परस्तिश से

इसी लिए तो वकालत भी छोड़ दी मैंने

शाइर

सैफ़ बाबर

(Mohd Saif Babar)

+91 9936008545 

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सब कुछ ढका है और छुपा कुछ भी नहीं है 

जिस्मों की नुमाइश में खरा कुछ भी नहीं है 

फ़ैशन के नए दौर का पहलू ये अजब है 

दिखता तो बहुत कुछ है बचा कुछ

शाइर

सैफ़ बाबर

(Mohd Saif Babar)

+91 9936008545 

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जिस में हो ज़िन्दगी वो नज़ारे बना ज़रा

बम की जगह तू पानी के धारे बना ज़रा

दावे जो कर रहा है ख़ुदाई तू तो फिर

दिखला बना के चाँद सितारे बना ज़रा

शाइर

सैफ़ बाबर

(Mohd Saif Babar)

+91 9936008545

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ग़रीबी अपने पसीने से जब भिगोती है 

ख़ुशी के आँसू ये ख़ुद्दार मिट्टी रोती है 

ये चिलचिलाती हुई धूप और ये मज़दूर

ये देखो ऐश की ता'मीर कैसे होती है

शाइर

सैफ़ बाबर

(Mohd Saif Babar)

+91 9936008545 

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संभाले रखना शहीदों की ये अमानत है 

ये सिर्फ़ झंडा नहीं अमन की ज़मानत है 

इन आँधियों में भी किस शान से है लहराता 

ख़ुदा का शुक्र तिरंगा अभी सलामत है 

शाइर

सैफ़ बाबर

(Mohd Saif Babar)

+91 9936008545 

...... 

जाके दोज़ख़ में बस गई होती

बच गई वर्ना फँस गई होती

उनका साया अगर नहीं होता

सारी दुनिया झुलस गई होती

शाइर

सैफ़ बाबर

(Mohd Saif Babar)

+91 9936008545 

... 

दिल में अब तक तो समाई भी नहीं है कोई 

अपनी तो दूर पराई भी नहीं है कोई 

जनवरी आ गया अब कैसे कटेंगी रातें 

सर्द मौसम है रज़ाई भी नहीं है कोई

शाइर

सैफ़ बाबर

(Mohd Saif Babar)

+91 9936008545

.... 

हम रज़ाई से निकल आए हैं सोते-सोते

तेरे ख्वाबों ने मिरी जाँ मुझे झिंझोड दिया 

सर्द मौसम में भी लगने लगी गर्मी मुझको 

तेरी यादों ने दिसम्बर का भरम तोड़ दिया

शाइर

सैफ़ बाबर

(Mohd Saif Babar)

+91 9936008545 

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जवानीयों की रगों से तरंग ले लेगा 

नशा बुरा है ये सारी उमंग ले लेगा

मदद ग़रीब की करते हुए न लो तस्वीर 

सवाब वर्ना गुनाहों का रंग ले लेगा

शाइर

सैफ़ बाबर

(Mohd Saif Babar)

+91 9936008545 

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